इतिहास/पृष्ठभूमी

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण, आमतौर पर यूपीडा के नाम से संबोंधित किया जाता है। इसकी स्थापना यूपी औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 1976 के अंतर्गत हुई थी। इसकी स्थापना प्रदेश में एक्सप्रेसवे परियजनाओं को कार्यान्वयन करने के लिए बतौर एजेंसी के रूप में की गई है एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सौंपी गई परियोजनाएं पर यह संस्था काम करेगी। वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार ने इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट एण्ड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड पर यूपीडा को दो ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे परियोजनाएं सौंपी हैं।

उत्तर प्रदेश की प्रगति को और बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने ईपीसी मोड के तहत “आगरा से लखनऊ 6 लेन एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे (ग्रीनफील्ड) परियोजना” बनाने का ऐतिहासिक कदम उठाया है। यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना 302.22 किमी लंबी है और यह एक्सप्रेवे आगरा, फिरोज़ाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरया, कन्नौज, कानपुर नगर, उन्नाव, हरदोई एवं लखनऊ जिलों से पास होगा। यह वर्तमान में देश की सबसे लंबी एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे परियोजना होगी, जिससे आगरा से लखनऊ तक का यात्रा का समय 4 घंटे तक घट जाएगा। एक्सप्रेसवे की चौड़ाई लगभग 110 मीटर (6 लेन) होगी और इस पर दौड़ने वाली गाड़ियों की औसत रफ्तार 120 किमी प्रति घंटा होगी। इस परियोजना के तहत मेन रोड, पद यात्रियों एवं जानवरों के लिए अंडरपास, ग्रीन बेल्ट का प्रावधान एवं सर्विस रोड जैसी सुविधाओं के प्रावधानों को भी सम्मिलित किया गया है। विश्राम क्षेत्र, पेट्रोल पंप, सर्विस स्टेशन और ढाबों आदि जैसी सुविधाओं को एक्सप्रेसवे के दोनो ओर स्थापित किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश की इस प्राथमिकी परियोजना का मुख्य फायदा यह होगा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राज्य की राजधानी लखनऊ के बीच का आवागमन काफी हद तक सुविधाजनक हो जाएगा। इस परियोजना से काफी हद तक ईंधन की भी बचत होगी, जिससे प्रदूषण में भी काफी गिरावट आने की संभावनाएं बढ़ जाएगी। इस परियोजना के तहत आने वाले सभी क्षेत्रों का आर्थिक एवं सामाजिक विकास होगा। इसके अतिरिक्त कृषि, वाणिज्य, पर्य़टन एवं औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रमुख शहर जैसे- आगरा, फिरोज़ाबाद, इटावा, कन्नौज, औरइया, कानपुर नगर एवं लखनऊ के बीच व्यवसाय सुविधा भी बढ़ जाएगी। औद्योगिक एवं कृषि दृष्टिकोण से इटावा एवं मैनपुरी जैसे शहरों का भी विकास होगा, जिससे औद्योगिक इकाई के उत्पादों में भी बढ़त्तरी होगी।

इस एक्सप्रेसवे के बनने से हस्तकरघा, खाद्य प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज, भण्डारण एवं दूध उद्योग के विकास एवं इन्हें स्थापित करने के अवसर भी बढ़ जाएंगे। इस परियोजना से नए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, शैक्षिक संस्थान, मेडिकल संस्थाना एवं नए उपग्रहों एवं स्मार्ट सिटी को स्थापित करने में भी मदद मिलेगी। यूपीडा इस परियोजना को 22 महीनों में समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित कर चुका है।

इस एक्सप्रेसवे परियोजना के अतिरिक्त, यूपीडा ईपीसी मोड के अंतर्गत एक अन्य एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे परियोजना पर भी कार्य कर रहा है, जिसका नाम “समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे परियोजना” है। पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं राज्य की राजधानी लखनऊ को जोड़ने वाली यह एक्सप्रेसवे परियोजना पर काफी तेजी से काम चल रहा है। यह परियोजना लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसव एवं यमुना एक्सप्रेसवे (पहले से ही चालू) जो लखनऊ, आगरा, ग्रेटर नोएडा जैसे शहरों को जोड़ता है, को भी इसमें सम्मिलित कर रहा है। कम समय में यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना हाई स्पीड एक्सेस कंट्रोल्ड रोड इंफ्रास्ट्रक्चर एनसीआर एवं आसपास के क्षेत्रों को पूर्वी उत्तर प्रदेश से जोड़ देगा।

350 किमी लंबे 6 लेन एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसव परियोजना प्रदेश के 9 जिलों (लखनऊ, बाराबंकी, फैजाबाद, अमेठी, सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, मऊ एवं गाजीपुर) को जोड़ेगा। 8 पैकजों के लिए रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन (आरएफक्यू) पर भारी प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है। 10 चयनित आरएफक्यू आवेदकों को रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल के लिए निर्गत कर दिया गया है और जल्द ही उन्हें दूसरे चरण की बोली प्रक्रिया में भाग लेने दिया जाएगा।